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एंड्रॉइड M के सबसे अच्छे फीचर्स में से एक है ऐप परमीशन। एंड्रॉइड M के साथ गूगल ने ऐप परमीशन को बढ़ा दिया है। इस फीचर के बाद ऐप नहीं बल्कि यूजर के तय कर पाएगा की कैसी परमीशन के साथ ऐप इंस्टॉल करना है। आसान शब्दों में कहें तो कोई ऐप फोन का कितना डाटा इस्तेमाल कर पाएगा और कितना नहीं ये यूजर पर निर्भर करेगा। इसी के साथ, यूजर्स सेटिंग्स के जरिए सभी ऐप्स परमीशन मैनेज कर पाएंगे।
गूगल ने एक नया फीचर नाओ ऑन टैप भी इस ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ पेश किया है। ये पूरी जानकारी एक टैप पर उपलब्ध होगी। इसमें सब कुछ जैसे यूजर्स ने क्या किया, क्या हिस्ट्री रही, क्या लोकेशन है सब कुछ एक टैप पर उपलब्ध होगा। इस सबके लिए पहले यूजर्स वॉइस कमांड का इस्तेमाल करते थे।
गूगल ने अभी क्रोम का एक नया फीचर लॉन्च किया है जिसे क्रोम कस्टम टैब्स कहते हैं। इस फीचर की मदद से यूजर्स क्रोम टैब्स को एंड्रॉइड प्लेटफॉर्म में ऐप्स की मदद से कस्टमाइज कर सकते हैं। आसान शब्दों में कहें तो अगर कोई ऐप आपको क्रोम ब्राउजर खोलने के लिए कहता है तो क्रोम में वो डाटा सेव हो जाएगा। अगली बार भी उसी जगह से क्रोम ब्राउजर को खोल सकते हैं।
नए ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ नया रैम मैनेजर भी आ गया है। इसका मतलब कौन सा ऐप फोन की कितनी मेमोरी का इस्तेमाल करता है ये नए तरीके से होगा। इसके अलावा, यूजर्स को ये भी पता चलेगा की तत्कालीन इस्तेमाल करने वाले ऐप्स कितनी मेमोरी इस्तेमाल कर रहे हैं ये भी पता होगा।
एंड्रॉइड M के साथ नया ऐप ड्राअर भी आएगा। ये विजेट पिकर की तरह होगा। अब ऐप्स को स्क्रीन पर साइड वाइज की जगह वर्टिकली स्क्रॉल किया जाएगा। इसके अलावा, कलर और रीडिजाइनिंग पुरानी ही लगेगी।
जैसा की पहले भी अंदाजा लगाया जा रहा था गूगल भी एप्पल की तरह अपने ऑपरेटिंग सिस्टम में फिंगरप्रिंट रीडिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया है। ये नया फीचर स्कैनर्स के साथ काम करने के लिए बनाया गया है। फिलहाल सैमसंग गैलेक्सी S6, HTC ONe M9 जैसे स्मार्टफोन्स में पहले से ही फिंगरप्रिंट स्कैनर मौजूद है। अब एंड्रॉइड M में ये टेक्नोलॉजी आने से उम्मीद की जा सकती है कि अब सस्ते डिवाइसेस में भी ये तकनीक आएगी।
ये भले ही एप्पल PAY की कॉपी लगे, लेकिन गूगल का एंड्रॉइड PAY कुछ नया है। ये भी एप्पल PAY की तरह NFC के जरिए काम करता है। इसका मतलब ये है कि NFC पर काम करने वाले सभी पोर्ट्लस पर ये काम कर सकेगा। एंड्रॉइड पे की मदद से मोबाइल पेमेंट्स हो सकेंगी। ये एंड्रॉइड किटकैट 4.4 या उससे ऊपर के ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करने वाले किसी भी डिवाइस पर काम कर सकेगा। हालांकि, भारतीय यूजर्स को इसके लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा।
नियर फील्ड कम्युनिकेशन (NFC) शॉर्ट रेंज में ज्यादा फ्रीक्वेंसी के साथ डिवाइसेस को कनेक्ट करने में मदद करता है। आसान शब्दों में लिमिटेड दूरी में तेज स्पीड के साथ NFC की मदद से वायरलेस डिवाइस कनेक्ट किए जा सकते हैं। ये फाइल शेयरिंग, इंटरनेट एक्सेस और बाकी ट्रांसफर के लिए काफी उपयोगी साबित होता है। खबरों के अनुसार, एप्पल ने डच चिपमेकर के साथ डील कर इस बार आईफोन में NFC का इस्तेमाल किया है। ये वन टच पेमेंट्स के लिए किया गया है।
एप्पल मैकबुक में USB C पोर्ट आने के बाद गूगल ने भी अब एंड्रॉइड M के साथ USB C टाइप पोर्ट्स का सपोर्ट फीचर दे दिया है। USB C टाइप पोर्ट्स दोनों तरफ से एक जैसे होते हैं। आसान शब्दों में कहें तो पोर्ट में किसी भी तरफ से केबल लगाई जाए वो काम करेगी। खबरों की मानें तो नेक्सस फोन ही वो पहले फोन्स हैं जिनके साथ ये पोर्ट्स आए हैं।
गूगल ने प्रोजेक्ट वोल्टा के तहत इस बार एंड्रॉइड की बैटरी को और बेहतर बनाया गया है। कंपनी का दावा है कि इस बार पावर कन्जम्पशन बेहतर होगा और बैटरी लाइफ बढ़ेगी। मल्टीटास्किंग के बाद भी बैटरी पावर कम नहीं होगी। इसके अलावा, फास्ट चार्जिंग फीचर और ऐप्स के द्वारा बैटरी खर्च करने की समस्या कम होगी।
गूगल के नए एंड्रॉइड ऑपरेटिंग सिस्टम 'M' को लेकर अब चर्चा आम हो गई है। इस ऑपरेटिंग सिस्टम का डेवलपर्स प्रिव्यू गूगल की I/O 2015 कॉन्फ्रेंस में लॉन्च किया गया है। इस ऑपरेटिंग सिस्टम के कई नए फीचर्स को लेकर बातें चल रही हैं, लेकिन hm आपको बताने जा रहा है इस ऑपरेटिंग सिस्टम के 10 बेस्ट फीचर्स के बारे में जो आने के बाद यूजर्स को पसंद आ सकते हैं।
1. ऐप परमीशन-
एंड्रॉइड M के सबसे अच्छे फीचर्स में से एक है ऐप परमीशन। एंड्रॉइड M के साथ गूगल ने ऐप परमीशन को बढ़ा दिया है। इस फीचर के बाद ऐप नहीं बल्कि यूजर के तय कर पाएगा की कैसी परमीशन के साथ ऐप इंस्टॉल करना है। आसान शब्दों में कहें तो कोई ऐप फोन का कितना डाटा इस्तेमाल कर पाएगा और कितना नहीं ये यूजर पर निर्भर करेगा। इसी के साथ, यूजर्स सेटिंग्स के जरिए सभी ऐप्स परमीशन मैनेज कर पाएंगे।
2. नाओ ऑन टैप-
गूगल ने एक नया फीचर नाओ ऑन टैप भी इस ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ पेश किया है। ये पूरी जानकारी एक टैप पर उपलब्ध होगी। इसमें सब कुछ जैसे यूजर्स ने क्या किया, क्या हिस्ट्री रही, क्या लोकेशन है सब कुछ एक टैप पर उपलब्ध होगा। इस सबके लिए पहले यूजर्स वॉइस कमांड का इस्तेमाल करते थे।
3. वेब एक्सपीरियंस-
गूगल ने अभी क्रोम का एक नया फीचर लॉन्च किया है जिसे क्रोम कस्टम टैब्स कहते हैं। इस फीचर की मदद से यूजर्स क्रोम टैब्स को एंड्रॉइड प्लेटफॉर्म में ऐप्स की मदद से कस्टमाइज कर सकते हैं। आसान शब्दों में कहें तो अगर कोई ऐप आपको क्रोम ब्राउजर खोलने के लिए कहता है तो क्रोम में वो डाटा सेव हो जाएगा। अगली बार भी उसी जगह से क्रोम ब्राउजर को खोल सकते हैं।
4. नया रैम मैनेजर-
नए ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ नया रैम मैनेजर भी आ गया है। इसका मतलब कौन सा ऐप फोन की कितनी मेमोरी का इस्तेमाल करता है ये नए तरीके से होगा। इसके अलावा, यूजर्स को ये भी पता चलेगा की तत्कालीन इस्तेमाल करने वाले ऐप्स कितनी मेमोरी इस्तेमाल कर रहे हैं ये भी पता होगा।
5. नया ऐप ड्रॉअर-
एंड्रॉइड M के साथ नया ऐप ड्राअर भी आएगा। ये विजेट पिकर की तरह होगा। अब ऐप्स को स्क्रीन पर साइड वाइज की जगह वर्टिकली स्क्रॉल किया जाएगा। इसके अलावा, कलर और रीडिजाइनिंग पुरानी ही लगेगी।
6. फिंगरप्रिंट सेंसर सपोर्ट-
जैसा की पहले भी अंदाजा लगाया जा रहा था गूगल भी एप्पल की तरह अपने ऑपरेटिंग सिस्टम में फिंगरप्रिंट रीडिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया है। ये नया फीचर स्कैनर्स के साथ काम करने के लिए बनाया गया है। फिलहाल सैमसंग गैलेक्सी S6, HTC ONe M9 जैसे स्मार्टफोन्स में पहले से ही फिंगरप्रिंट स्कैनर मौजूद है। अब एंड्रॉइड M में ये टेक्नोलॉजी आने से उम्मीद की जा सकती है कि अब सस्ते डिवाइसेस में भी ये तकनीक आएगी।
7. एंड्रॉइड PAY
ये भले ही एप्पल PAY की कॉपी लगे, लेकिन गूगल का एंड्रॉइड PAY कुछ नया है। ये भी एप्पल PAY की तरह NFC के जरिए काम करता है। इसका मतलब ये है कि NFC पर काम करने वाले सभी पोर्ट्लस पर ये काम कर सकेगा। एंड्रॉइड पे की मदद से मोबाइल पेमेंट्स हो सकेंगी। ये एंड्रॉइड किटकैट 4.4 या उससे ऊपर के ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करने वाले किसी भी डिवाइस पर काम कर सकेगा। हालांकि, भारतीय यूजर्स को इसके लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा।
* क्या होता है NFC-
नियर फील्ड कम्युनिकेशन (NFC) शॉर्ट रेंज में ज्यादा फ्रीक्वेंसी के साथ डिवाइसेस को कनेक्ट करने में मदद करता है। आसान शब्दों में लिमिटेड दूरी में तेज स्पीड के साथ NFC की मदद से वायरलेस डिवाइस कनेक्ट किए जा सकते हैं। ये फाइल शेयरिंग, इंटरनेट एक्सेस और बाकी ट्रांसफर के लिए काफी उपयोगी साबित होता है। खबरों के अनुसार, एप्पल ने डच चिपमेकर के साथ डील कर इस बार आईफोन में NFC का इस्तेमाल किया है। ये वन टच पेमेंट्स के लिए किया गया है।
8. रिवर्सिबल USB C पोर्ट्स-
एप्पल मैकबुक में USB C पोर्ट आने के बाद गूगल ने भी अब एंड्रॉइड M के साथ USB C टाइप पोर्ट्स का सपोर्ट फीचर दे दिया है। USB C टाइप पोर्ट्स दोनों तरफ से एक जैसे होते हैं। आसान शब्दों में कहें तो पोर्ट में किसी भी तरफ से केबल लगाई जाए वो काम करेगी। खबरों की मानें तो नेक्सस फोन ही वो पहले फोन्स हैं जिनके साथ ये पोर्ट्स आए हैं।
9. बेहतर बैटरी लाइफ-
गूगल ने प्रोजेक्ट वोल्टा के तहत इस बार एंड्रॉइड की बैटरी को और बेहतर बनाया गया है। कंपनी का दावा है कि इस बार पावर कन्जम्पशन बेहतर होगा और बैटरी लाइफ बढ़ेगी। मल्टीटास्किंग के बाद भी बैटरी पावर कम नहीं होगी। इसके अलावा, फास्ट चार्जिंग फीचर और ऐप्स के द्वारा बैटरी खर्च करने की समस्या कम होगी।
http://www.bhaskar.com/news-hf/GAD-SPE-google-android-m-top-9-new-features-for-users-5011024-PHO.html








